Sai Ankur



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Fast Facts
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Other Names and Nicknames: 
Sai Ankur (BaBa)
Function: 
Spiritual Thinker
Traditions: 
Nath Sampradaya, Advaita Vedanta, Hinduism, Buddhism
Main Countries of Activity: 
India
Date of Birth: 
19/12/1995
Place of Birth: 
Gajraula, Uttar Pradesh, India
In His/Her Body ("alive"): 
Yes

Biography

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संपूर्ण अध्यात्मिक जगत में साईं अंकुर श्रेष्ठतम प्रतिष्ठित विरोधाभासी अध्यात्मिक व्यक्ति के रूप में विख्यात हैं। और अवधूत समप्रदाय (गुरु समप्रदाय) के आदिगुरु स्मृतिगामी भगवान श्री दत्तात्रेय जी महाराज, श्रीपाद श्रीवल्लभ जी महाराज, श्री नृसिंह सरस्वती जी महाराज, श्री अक्कलकोट स्वामी समर्थ जी महाराज, श्री गजानन महाराज, श्री शिरड़ी साईं बाबा जी महाराज, श्री हरि बाबा जी महाराज द्वारा प्रतिपादित मुक्तिमार्ग के साक्षात साईं स्वरूप करुणामयी दिव्य मार्ग दर्शक हैं। वो गुरु सम्प्रदाय के स्वंयभू शिष्य हैं। सही मायने में अध्यात्मिक मार्ग के पथिक, अवधूत समप्रदाय के सच्चे भक्त, इन्हें श्रद्धा पूर्वक नमन् कर साईं अंकुर में अवधूत गुरु चेतना का प्रखरित स्वरूप की झलक देख, उनसे मार्ग दर्शन प्राप्त कर अवधूत धारा से लाखों लोग जुड़ गए हैं। आज, देश-विदेश में लाखों भक्त साईं अंकुर जी को अपना आध्यात्मिक स्तम्भ एवं मार्गदर्शक मानते हैं। और अवधूत सम्प्रदाय द्वारा दिखाए गए "मुक्तिमार्ग" का अनुशरण कर "विश्व साईत्व जाग्रति आंदोलन" से जुड़ रहे हैं। साईं अंकुर जी स्वयं को साईं बाबा और अवधूत समप्रदाय रूपी मन्दिर की साफ-सफाई करने वाला महज एक झाड़ू मानते हैं। वे अवधूत समप्रदाय द्वारा सिखाए गये मानवता के संदेश, जो कि प्रेम, सद्भावना, एकता, शुद्ध आचरण, एकेश्वरवाद, सहिष्णुता, ज्ञान, करुणा, सबुरी, श्रद्धा पर आधारित हैं। इनका प्रचार देश विदेश में, जन मानस में करते हैं। साईं अंकुर जी साईं बाबा के अनन्य आत्मज्ञ हैं। व अन्य मनुष्यों को अवधूत गुरुओ की राह पर चलने के प्रेरणास्रोत हैं। सांई अंकुर जी कहते हैं। कि:-”समस्त अवधूत गुरु व शिरडी सांई बाबा यथार्थ सत्य हैं।”
साईं अंकुर जी की पैतृक पृष्ठभूमि एक संभ्रांत उच्च कुलीन, सांस्कृतिक विरासत में धनी परिवार की है।
आपके पिता जी श्री छुट्टन सिंह चौहान जी एक प्रतिष्ठित किसान हैं। आपकी आदरणीय माता जी श्रीमती कृष्णा देवी जी प्रारंभ से ही अत्यंत धर्मनिष्ठ ग्रहिणी रहीं हैं। सांई अंकुर जी चार भाई-बहनों में सबसे छोटे हैं।
सांई अंकुर जी का जन्म 19 दिसंबर 1995 को उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गाँव फौंदापुर में हुआ व आप अपनी बालावस्था से ही दढ़ धर्मनिष्ठ रहे हैं।
जो मुल्य-गुण और आध्यात्मिक चिन्तन आपने अपने आदरणीय दादा श्री बलवीर सिह चौहान जी से आत्मसात किया था।
वैराग्य के कारण आपका पढाई में मन न लगा। लेकिन माता-पिता कहने पर आपने शिक्षा पुरी करने के पश्चात आप अपने परिवार, साईं बाबा, अवधूत समप्रदाय "विश्व सांईत्व जाग्रति आंदोलन" से जुड़े लाखों भक्तों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों व कर्तव्यों का बखूबी निर्वाह कर रहे हैं।
सन् 2009 में प्रथमतः साईं बाबा द्वारा आकृष्ट हुए और तभी से आप विश्व में अवधूत समप्रदाय का नेतृत्त्व कर शिरडी साईं व अन्य गुरुओं के मानवता के संदेश का प्रचार-प्रसार "विश्व सांईत्व जाग्रति आंदोलन" के नाम से देश-विदेश में कर रहे हैं। आप की इस प्रेरणा व मार्ग दर्शन से आज "विश्व सांईत्व जाग्रति आंदोलन" देश विदेश में नित नए कीर्तिमान स्थापित कर रहा है। और आज अरबों की तादाद में "विश्व सांईत्व जाग्रति आंदोलन" से जनसैलाब जुड़ता चला आ रहा है। आपके दिव्य प्रेरणा से "विश्व सांईत्व जाग्रति आंदोलन" प्रत्येक मनुष्य को अपने भीतर ईश्वर को खोजने व जाग्रति का मार्ग दिखाता है। सांई अंकुर जी की प्रेरणा अनुरूप एवं मार्गदर्शन में देश विदेश में विभिन्न स्थानों में उदाहणार्थ- सम्पूर्ण भारत, नेपाल, अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन इत्यादि में आज तकरीबन 280+ देशों में शिरडी साईं व अन्य अवधूत गुरुओं के मंदिर और सांईत्व जाग्रति आश्रम निर्माण हो चुके है। जो शिरडी साईं व अन्य अवधूत गुरुओं के मानवता के संदेश– शुद्ध आचरण, प्रेम, सहिष्णुता, मानवता, श्रद्धा, सबुरी – के प्रसार के केंद्र बिंदु हैं। ये संस्था सामाजिक क्षेत्र में सुधार हेतु कई चैरिटेबल कार्य भी करते हैं। उदाहरणार्थ- प्राकृतिक आपदाओं (बाढ़/चक्रवाती तूफान की स्थिति में) के दौरान मदद मुहैया कराना, मुफ्त चिकित्सा सेवा प्रदान करना, मुफ्त शिक्षा के अवसर देना, लंगर लगाना, इत्यादि कार्य करती हैं।

साँई अंकुर कहते हैं।
"ईश्वर ने अपने सब द्वार मेरे लिए खोल दिए हैं। मैं तो यह भी नहीं कह सकता कि मैं ईश्वर से संबंध रखता हूँ। क्योंकि मैं तो ईश्वर का एक हिस्सा हूँ। जब कोई फूल खिलता है। तो उसके साथ मैं भी खिलता हूं। में हर रोज जन्म लेता हूँ। जब सूर्य ऊगता है। तो उसके साथ मैं भी ऊगता हूं। अहंकार, जो लोगों को विभाजित करता है। वो अब मुझ में नहीं है। मेरा शरीर प्रकृति का हिस्सा है। और मेरा होना पूरी समग्रता का अंग है। मैं कोई भिन्न इकाई नहीं हूँ। मैं और मेरा ईश्वर एक हैं। जैसे मैं और वो मेरे जन्म से पहले थे।”
अपने कार्य के दौरान सांई अंकुर ने वस्तुत: मानव-चेतना के विकास के हर पहलू पर बोला है। भगवान दत्तात्रेय, सांई बाबा, गौतम बुद्ध, ईसामसीह, महावीर, गुरूनानक देव, रामकृष्ण परमहंस, स्वामी विवेकानन्द से लेकर गोरखनाथ जी आदि सैकड़ों रहस्यदर्शियों और विश्व प्रतिभाओं को सांई अंकुर ने समसामयिक मनुष्य के लिए पुनरुज्जीवित किया है। जो बौद्धिक समझ पर नहीं वरन उनके अपने अस्तित्वगत अनुभव की परख पर आधारित है।
वे अवधूत परंपरा से संबंध रखते हैं। वो बार बार कहते हैं।-
”मैं समयानुसार एक बिलकुल नई धार्मिक चेतना की शुरुआत हूं। मेरे शब्द जलते अंगारे हैं। जो स्वीकार करने पर तुम्हें शान्ति प्रदान करेंगे।”
वे कहते हैं।-
”कृपया मुझे अतीत के साथ मत जोड़ो वह याद रखने योग्य नहीं है। जो मै कल था वो आज नहीं हूँ। कल तक मैं एक शरीर था। लेकिन आज मैं चेतन हूँ।”
वे कहते हैं।-
”मेरा संदेश कोई चिंतन नहीं है। यह तो एक विज्ञान है। ये कोई सिद्धात नहीं है। जिसका तुम दुशाला ओढ़ लो और बड़ी-बड़ी बातें करते फिरो। यह कोई चिंतन नहीं है।"
पिछले वर्षों से सांई अंकुर ईश्वरीय ज्ञान को जन-जन तक पहुचाकर मनुष्यो में शान्ति, प्रेम, एकता, और जन जागरण फलित हो-
इस महासृजन में सतत रत हैं। वो प्रत्येक दिन हजारो शिष्यों, खोजियों और प्रेमियों की सभा में प्रवचन देते हैं। और उन्हें ईश्वर शरणागति और ईश्वर भक्ति में डुबाते हैं।
वे कहते हैं। कि-
”यदि तुमने मुझे प्रेम किया है। तो तुम्हारे लिए मेरे शब्द हमेशा जिंदा रहेगें।"
”यदि तुम मेरे शब्दों का अनुभव करने लगो, तो कोई भी मेरे शब्दों को वहा के लोगों के हृदय में प्रवेश करने से नहीं रोक सकता हैं।

Teachings

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"मैं समयानुसार एक बिलकुल नई धार्मिक चेतना की शुरुआत हूं। मेरे शब्द जलते अंगारे हैं। जो स्वीकार करने पर तुम्हें शान्ति प्रदान करेंगे।”

”कृपया मुझे अतीत के साथ मत जोड़ो वह याद रखने योग्य नहीं है। जो मै कल था वो आज नहीं हूँ। कल तक मैं एक शरीर था। लेकिन आज मैं चेतन हूँ।”

”मेरा संदेश कोई चिंतन नहीं है। यह तो एक विज्ञान है। ये कोई सिद्धात नहीं है। जिसका तुम दुशाला ओढ़ लो और बड़ी-बड़ी बातें करते फिरो। यह कोई चिंतन नहीं है।"

पिछले वर्षों से सांई अंकुर ईश्वरीय ज्ञान को जन-जन तक पहुचाकर मनुष्यो में शान्ति, प्रेम, एकता, और जन जागरण फलित हो-

इस महासृजन में सतत रत हैं। वो प्रत्येक दिन हजारो शिष्यों, खोजियों और प्रेमियों की सभा में प्रवचन देते हैं। और उन्हें ईश्वर शरणागति और ईश्वर भक्ति में डुबाते हैं।
वे कहते हैं। कि-

”यदि तुमने मुझे प्रेम किया है। तो तुम्हारे लिए मेरे शब्द हमेशा जिंदा रहेगें।"

”यदि तुम मेरे शब्दों का अनुभव करने लगो, तो किसी देश की सरकार मेरे शब्दों को वहा के लोगों के हृदय में प्रवेश करने से नहीं रोक सकती हैं"

Locations

BaBa Dham
Type: 
Temple
Address: 
Sabka Malik Ek Satsang Mission
Phoundapur Road,
Gajrauala, Uttar Pradesh 244235, India
Ram Talaiya Mandir
Phone: 
9152333030, 8859768080
Contact Persons: 
www.facebook.com/thakursaiankur
Special Events: 

Guru Purnima, Holi, Deepawali

Daily Schedule & Opening Hours: 

Anytime

Type: 
Temple